• भिक्खु बोधानंद और बहुजन सांस्कृतिक आंदोलन

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2017
    Subject(s):
    Indigenous peoples--Social life and customs, Blasphemy--Social aspects, Culture conflict--Religious aspects, Durgā (Hindu deity), Hinduism and politics, Hinduism and culture, Mythology
    Item Type:
    Book chapter
    Tag(s):
    Mahiṣāsuramardinī (Hindu deity), bahujan sanskriti, King mahishashur, mahishasur martyrdom day
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/1f35-8649
    Abstract:
    यह "महिषासुर: एक जननायक" पुस्तक के दूसरे संस्करण में प्रकाशित भूमिका है। इस किताब का पहला संस्करण जून, 2016 में आया। यह अक्टूबर, 2016 में पुर्नमुद्रित हुई और नवंबर, 2017 में नए ISBN नंबर के साथ दूसरा संस्करण प्रकाशित हुआ। तब से अब तक यह पुस्तक कई बार पुनर्मुद्रित हो चुकी है। पहले संस्करण के कई लेख पहले पुनमुर्द्रण और दूसरे संस्करण में हटा दिए गए थे और कुछ नए लेख जोड़े गए थे। इस भूमिका महिषासुर के नाम से शुरु हुए आंदोलन की सार्थकता और प्रासंगिकता पर विचार करते हुए कहा गया है कि इसकी कड़ियां सांस्कृतिक और सामाजिक वर्चस्व का प्रतिरोध करने वाली गौरवशाली बहुजन परंपरा से जुड़ती है।
    Notes:
    महिषासुर: एक जननायक पुस्तक का हिंदी संस्करण यहां देख सकते हैं: https://hal.science/hal-03749960 महिषासुर: एक जननायक का अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित है। उसे यहां देखा जा सकता है: https://hal.science/hal-03834426v1 इसी विषय पर एक और पुस्तक "महिषासुर: मिथक व परंपराएं शीर्षक से भी प्रकाशित है। उसके बारे में यहां देख सकते हैं:https://doi.org/10.17613/hz5d-e827
    Metadata:
    Published as:
    Book chapter    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 year ago
    License:
    Attribution-NonCommercial

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