• हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष

    Editor(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2016
    Group(s):
    Cultural Studies, Gender Studies, Literary theory, Public Humanities, Sociology
    Subject(s):
    Race in literature, Caste in literature, Hindi literature, Social justice, Caste-based discrimination, Dalits in literature, Literature and society, Criticism, Literary movements, Culture
    Item Type:
    Book
    Tag(s):
    Arts and Humanities, History of Hindi literature, Hindi literature--History and criticism, Bahujan
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/djvc-zg28
    Abstract:
    इस पुस्तक में बहुजन साहित्य की अवधारणा की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। बहुजन साहित्य की अवधारणा का पैमाना लेखक का कुल लेखकीय-वैचारिक अवदान है। इसलिए द्विज समुदाय से आने वाले ऐसे लेखकों के लिए भी इसमें स्थान है, जिनकी दृढ पक्षधरता इन वंचित तबकों के प्रति हो। जैसा कि हम फारवर्ड प्रेस में कहते आए हैं कि यह अवधारणा उस विशाल छतरी की तरह है, जिसके अंतर्गत मौजूदा दलित साहित्य भी है, आदिवासी साहित्य भी और स्त्री साहित्य भी; लेकिन जरूरत इस बात की है कि इसके साथ ही ओबीसी, पसमांदा और घूमंतू जातियों के साहित्य भी स्वतंत्र रूप सामने आएं तथा उनकी विशिष्टताओं के साथ-साथ उनके सांझे मूल्यों, सौंदर्य विधानों का समेकित आलोचनात्मक मूल्यांकन भी हो। साहित्य की यही बहुजन अवधारणा अभिजन साहित्य को हाशियाकृत करने में सक्षम होगी।
    Notes:
    एक सच्चे लोकतंत्र में न तो किसी तरह की सामाजिक गैर बराबरी की जगह हो सकती है और न ही किसी तरह की आर्थिक असुरक्षा की। इन दोनों कसौटियों को परखे तो अभी हम एक पिछड़े हुए लोकतंत्र में जी रहे हैं। पुस्तक को यहाँ देखें- https://www.flipkart.com/hindi-sahityetihas-ka-bahujan-paksh/p/itmeh6dr554fuffy
    Metadata:
    Published as:
    Book    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 year ago
    License:
    Attribution

    Downloads

    Item Name: pdf हिंदी-साहित्येतिहास-का-बहुजन-पक्ष.pdf
      Download View in browser
    Activity: Downloads: 411